हार कर भी जितना ………!

हार कर भी जितना ………!

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कहते है की “अंगारों के रास्ते चलकर मंजिल हासिल नहीं होती” यदि मुकदर में लिखी किस्मत बदल दी जाए तो पाने के लिए बुढ़ापा आ जायेगा।

“हमने एक कहानी सुनी है की एक आदमी जमीन पाने के लिए सुबह से शाम तक दौड़ा चला जा रहा है और आखिर में वही दफन हो जाता है। ऐसी अंधा धुंध दौड़ में आखिर पाया भी क्या ? काफी लोग होते है जो अपनी मंजिल वक्त से पहले प्राप्त हो जाते है, तो काफी लोग लगातार मेहनत करते करते बुढ़ापा आ जाता है तब कुछ हासिल हो जाता है। वाकई में हर कोई आपने जीवन को जितना चाहता है।

सबकुछ पा लेना जैसे एक घर गाड़ी बच्चो का एजुकेशन उनके भविष्य को बनाने की चिंता या फिर एक लक्जरी लाइफ जीने के दौड़ में क्या हासिल कर लिया । जवाब में मुझे मिला की हमने अपना स्टेटस बना लिया है। ऐसी बात पर कभी मन ही मन में हसी आ जाती है। स्टेटस क्या होता है, जो अपनो को दिखाना या दोस्तो को जाहिर करना की देखो में आज क्या हूं। क्या बन चूका? यदी उसी स्टेटस वाले इंसान को पूछा जाए कि क्या किया आज तक जिससे यह स्टेटस प्राप्त कर लिया । जवाब अक्सर उटपटांग ही मिले जिन्हे सुनकर हैरान हो जाता हूं। वाकई में स्टेटस क्या है। आप सभी इसका जवाब दे जिससे मैं अपना अगला विन ऑफ लाइफ की पहल और जोरो से आगे बढ़ाया जाए।यह एक आम आदमी के जीवन पर है जो अपने जीवन में आगे बढ़ रहा है और जिम्मेदारियां भी निभा रहा है और साथ ही जीवन में प्यार का महत्व भी इसमें दर्शाया गया है।

इसी जीवन में सिर्फ परिवार या मित्र ही हमारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के उत्तीर्ण के लिए किया गया कार्य भी हमारी जिम्मेदारी है जिसे बिना स्वार्थ से निभाना है।

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