अडूसा जीवन का मंत्र


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ऐसी कोनसी घटनाएं है जो शरीर की रोग प्रतिकार क्षमता कम कर देती है और हम बीमार हो जाते है।

हमारे पूर्वज की बात की जाए तो वह काफी वर्ष तक जीवित रहते थे जिसे हम लंबी आयु कह सकते है। उस समय की बात की जाए तो उस वक्त उतनी मेडिकल सुविधाएं नही थी फिर भी उनकी तुलना में हम इस समय जो सुविधा मिल रही है वह काफी बेहतर है।

जब भी मौसम बदलता है तो छोटी मोटी बीमारियां हमारे शरीर को छू लेती है ऐसा क्यूं होता है? काफी लोग साथ में टैबलेट लेकर ही हर जगह आना जाना करते है । जिसे एक चलती फिरती मेडिकल शॉप भी कह सकते है।

वास्तविकता से हम कभी सोचते ही नही ऐसा क्यूं होता हैं? यदि हम सिर्फ बात करे बुखार आना, सर्दी खासी होना तब भी हम बिना सोचे समझे दवाइयों का सेवन करते है जिसके कुछ सालो बाद साइड इफेक्ट दिखाई देते है। एक समय ऐसा आता है की जितना कमाना नहीं होता उससे ज्यादा हम दवाइयों में खर्चा कर देते है। इससे बचने के लिए अडूसा का इस्तमाल कर सकते है जिससे शरीर हमेशा तंदुरस्त रह सकता है और छोटी बड़ी बीमारियों से दूर रख सकता हैं।

अडूसा हम अपने घर के आंगन में या फिर एक पौधा लगा सकते है जिससे हमेशा से हम निरोगी रह सके।

अडूसा का इस्तमाल हमेशा रोज सुबह या शामको एक उसका काढ़ा बनाकर पी सकते है। जिससे बुखार सर्दी और खासी जैसी बीमारी चुटकियों में दूर कर सकते है साथ ही मैं रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ा देता है।

अडूसा का काढ़ा बनाने के लिए हमे कुछ अडूसा के पत्ते, अदरक, काली मिर्च और एक तुलसिका पता लेकर अच्छी तरीके से पीस कर रखें। दूसरी और एक ग्लास पानी गरम करे उसमे अडूसा का पीसा हुए घोल को उस पानी में उबाल आने तक रखिए। जब ठंडा हो जाए तब उसका खाली पेट रोज सेवन करने से हम हमेशा निरोगी रह सकते है।

सिर्फ अडूसा के पत्तो का घोल भी बनाकर पी सकते हो जिसकी खांसी काफी समय से आ रही हो और वह लंबे समय से दवाइयां ले रहा है पर खांसी खत्म होने का नाम ही नही ले रही है उस वक्त आप अडूसा का काढ़ा अवश्य ले सिर्फ दो दिनों में ही आपको बदलाव दिखाई देगा।

कहते है स्वास्थ ही जीवन की पूंजी है। आप हमे कमेंट्स कर के भी सलाह ले सकते है।


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