बैंक की लूट आम आदमी पर


आज कल हर कोई किसी ना किसी समस्या से जुड़ा हुआ रहता है। चाहे वह मानसिक हो या फिर फाइनेंशियल ही क्यों ना हो।

इन सबसे ज्यादा मोबाइल आने के बाद तो और भी ज्यादा परेशानियां बढ़ जाती है। यदि हम फाइनेंशियल समस्या के जुझते है तो सीधा किसी से उधार ले लिया या तो बैंक से कर्जा ले लिया जाए।

कर्जा आपको नही भी लेना हो तो आए दिन बैंक हमे किसी न किसी कारण से परेशान करती रहती है एक तरह का मानसिक हैरेसमेंट ही कहा जाय उसे क्योंकि एक सामान्य इंसान सिर्फ मोबाइल खरीदता है या कुछ भी तो उसके हर महीने की किश्त चुकाते समय वह हमेशा यह सोचता रह जाता है की मेरा लोन जल्द से जल्द खतम हो जाए।

जब वह पहली लोन खतम करता है तो बैंक का हैरेसमेंट की सुरवात हो जायेगी। सबसे ज्यादा वह लोग ज्यादा फसते है जिनकी महीने की तनख्वा 30 हजार अधिक हो।

ऐसे कस्टमर को आए दिन बैंक की तरफ से फोन एसएमएस या उनकी बर्थडे पर विश करना हो या शादी की साल गिरा ही क्यों ना हो उसे हम भूले या ना भूले पर बैंक नही भूलेगा।

यह उनकी पहली सीडी होती है परेशानी करने कि और उसके बाद आए दिन फोन आयेंगे किसी लोन के लिए, क्रेडिट कार्ड के लिए या फिर इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए।

गलती से भी एक चीज ले ली तो बाकी दूसरी बैंक भी आपके पीछे लग जायेगी और परेशान करने के लिए मुर्गा मिल गया ।

वह इंसान किस हालत में है या किस हालत में है उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता पर अपनी चीज बेचनी चाहिए।

बैंक की वसूली करने के तरीके भी लाजवाब होते है। आप यदि अपना स्टेटमेंट को गौर से देखो तो कभी कुछ नजर नहीं आएगा । क्योंकि आप को सिर्फ उनकी ऑफर रिवार्ड्स कैशबैक में देखतेही नही की कितना चार्ज लगा है । सामान्य इंसान यह सब पड़ता ही नही सीधा हफ्ते की तारीख हो या बिल भरना हो वही रक्कम याद रखता है।

जब कोई बंदा लोन या क्रेडिट कार्ड लेता है उसी वक्त ही कितना चार्ज लगेगा वह जान लेता है।

ऑनलाइन किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने पर नो कोस्ट ईएमआई को हम सेलेक्ट कर भी लेते है फिरभी बिल जनरेट होने पर बैंक उस पर जीएसटी लगा देता है साथ ही मैं इंट्रेस्ट भी जुड़ता है इस तरीके से बैंक लुटती है। यह तो काफी लोगो के साथ हुआ होगा, नही देखा हो तो एक बार अपना स्टेटमेंट अवश्य देख ले।


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